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पर्वत प्रदेश में पावस

                                               पाठ – 5 पर्वत प्रदेश में पावस – सुमित्रानंदन पंत v   प्रश्न 1. पावस ऋतु में प्रकृति में कौन – कौन से परिवर्तन आते हैं ? v   प्रकृति के परिवर्तन को संक्षेप में लिखिए । उत्तर – 1. प्रकृति का रूप वर्षा ऋतु में पल – पल परिवर्तित होता है । 2. पहाड़ों पर निर्झर अपने पूर्ण यौवन पर होते हैं । 3. पेड़ – पौधे पुष्पों तथा नव- पल्लवों से लद जाते हैं । 4. आकाश में बादल छाए रहते हैं । 5. ऊँचे – ऊँचे पेड़ अपलक आकाश की ओर निहारते (देखते) प्रतीत होते हैं । 6. अचानक तेज़ वर्षा होने के कारण झरनों का संगीत शोर में बदल जाता है । 7. शाल के वृक्ष डर के मारे धरती में धँस गए प्रतीत होते हैं । 8. प्यासी धरती का हृदय आनंदित हो जाता है । प्रश्न 2. ‘ मेखलाकार ’ शब्द का क्या अर्थ है ? कवि ने इस का प्रयोग यहाँ क्यों किया है ? v ...

तोप

                                                   पाठ – 7 तोप – वीरेन डंगवाल प्रश्न (क)1. विरासत में मिली चीजों की बड़ी संभाल क्यों होती है ? v   विरासत में मिली चीजों की संभाल करने के पीछे क्या उद्देश्य है ? उत्तर – 1. विरासत – सभ्यता – संस्कृति का महत्त्वपूर्ण अंग ।             2. पूर्वजों की धरोहर भावी पीढ़ी के लिए विरासत ।             3. नई पीढ़ी उनके विषय में जानें , अनुभवों से कुछ सीखें और उनकी बनाई हुई श्रेष्ठ परम्पराओं का पालन करें ।            4. अपनी सभ्यता और संस्कृति की कद्र करना सीखें ।            5. आने वाले सम...

मनुष्यता

                                       मनुष्यता – मैथिलीशरण गुप्त v   प्रश्न 1. कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है ? v   कवि ने मनुष्य को मृत्यु से न डरने का संदेश क्यों दिया है ? उत्तर – कवि कहते हैं कि मरना तो संसार में सबको है , अमर कोई भी नहीं है । परंतु संसार उसी मनुष्य को याद रखता है जो मानवता को सर्वोपरि धर्म मानता है और जिस मनुष्य में अपने और अपनों के हित -   चिंतन से पहले दूसरों का हित – चिंतन होता है । जो जगत की भलाई के लिए अपना सर्वस्व लुटा देता है , दरअसल उसी मनुष्य की मृत्यु को सुमृत्यु माना जा सकता है । v   प्रश्न 2. उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है ? v   उदार व्यक्ति की क्या विशेषताएँ होती हैं ? धरा उसके प्रति किस भाव का अनुभव करती है ? v   जो व्यक्ति शुभ कर्म करते हैं , उन्हें उनके महान कार्यों का प्रति...

मीरा के पद

                           पाठ – 2 मीरा के पद – मीराबाई प्रश्न(क)1. पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है ? v   मीरा ने किन – किन पर की गई कृपा को स्मरण करते हुए हरि से अपनी पीड़ा को हरने की विनती की है ? v   मीराबाई ने हरि से स्वयं का कष्ट दूर करने की जो विनती है , उसमें स्वयं का कृष्ण से कौन – सा संबंध बताया है ? v   भगवान ने अपने भक्तों की रक्षा किस प्रकार की ? मीरा ने उन भक्तों का हवाला क्यों दिया है ? v   ‘ हरि अपने भक्तों की रक्षा करते हैं ’ । मीरा के पदों में इस बात को किस प्रकार सिद्ध किया गया है । उत्तर – पहले पद में मीरा ने तीन उदाहरणों द्वारा अपनी पीड़ा हरने की विनती की है – 1.       जैसे आपने भरी सभा में द्रौपदी का चीर बढ़ा कर उसकी लाज रखी , वैसे ही आप मेरी भी लाज रखें । 2.       जैसे आपने प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण ...